Monday, September 28, 2026
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भाजपा प्रेस वार्ता: कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप

जनसागर टुडे 

आजमगढ़ / अजय सिंह – आजमगढ़ भाजपा जिला कार्यालय पर आयोजन प्रेस वार्ता मे पत्रकारों से वार्ता करते हुए जिलाध्यक्ष ध्रुव कुमार सिंह ने कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक कमजोरियों पर आत्ममंथन करना चाहिए। प्रशासनिक एवं संवैधानिक विषयों को राजनीतिक ढाल बनाकर जनता के बीच भ्रम पैदा करने से कांग्रेस की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। लगातार मिल रही हार से बौखलाई कांग्रेस अपनी राजनीतिक नाकामियों को छिपाने के लिए बार-बार देश की संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही है। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करने के बजाय कांग्रेस और उसके नेता जनादेश का अनादर करने की अपनी पुरानी आदत से बाज नहीं आ रहे। कांग्रेस के तमाम बड़े नेता जान चुके हैं कि संवैधानिक व्यवस्था एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया में वे अब जनता का विश्वास पुनः हासिल नहीं कर सकते हैं। यही वजह है कि वे पूरे जनतांत्रिक सिस्टम पर भ्रम एवं झूठ फैलाकर, उन्हें ध्वस्त करना चाहते हैं। इसी रणनीति के तहत वे संवैधानिक संस्थाओं पर अनर्गल हमला करते हैं। कांग्रेस जब भी चुनाव हारती है, तब-तब वह चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश रचती है। अपनी जमीनी विफलता से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के झूठे और बेबुनियाद बयान दिए जाते है। चुनाव आयोग के संयुक्त बयान से कांग्रेस और विपक्षी इंडी गठबंधन के झूठ का पर्दाफाश हुआ है; भ्रम और मनगढ़ंत कहानियों की राजनीति पूरी तरह ध्वस्त हुई है। चुनाव आयोग की बैठक और संयुक्त प्रेस नोट से दूध का दूध और पानी का पानी हुआ, कांग्रेस व विपक्ष सिर्फ और सिर्फ झूठ, सनसनी और भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। कांग्रेस का झूठ बेनकाब हो गया। तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए एसआईआर समेत सभी फैसले, निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष की हताशा का प्रतीक है। कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखा पत्र किसी नीतिगत विषय या एसआईआर से संबंधित नहीं था, बल्कि एक अखबार की रिपोर्ट कोरी कल्पना पर आधारित गढ़ी गई कहानी साबित हुई। फॉर्म-6 के घोषणापत्र को माननीय सर्वोच्च न्यायालय पहले ही वैध ठहरा चुका है, जिससे विपक्ष की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश फिर नाकाम हुई है। कांग्रेस अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है। चुनाव आयोग की स्पष्टता के बाद कांग्रेस के आरोपों की वास्तविकता सामने आ गई है। ऐसे में कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय तथ्यों का सम्मान करना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों (डॉ. एस.एस. संधू एवं विवेक जोशी) की 26 सितंबर को बैठक हुई और उसके बाद चुनाव आयोग की ओर से एक जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट जारी किया गया, जिसमें यह स्पष्ट कर दिया गया है कि देशभर में संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) सहित सभी प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। 24 जून 2025 का मूल आदेश हो, या विभिन्न चरणों की समय-सारणी, सभी निर्णय पूरे आयोग की पूर्ण सहमति से लिए गए हैं। इतना ही नहीं, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को इस प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध ठहराया है। इसके बावजूद विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता और प्रक्रियाओं पर झूठा कीचड़ उछालने का घिनौना काम कर रहा था। विपक्ष द्वारा एक तथाकथित पत्र को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा था, आयोग ने साफ कर दिया है कि कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखा गया पत्र आयोग की किसी नीति या आईटी प्रभाग से संबंधित नहीं था, बल्कि यह प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर आए एक अधिकारी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली तक सीमित आंतरिक मामला था। न तो यह निर्णय आयोग के किसी नीतिगत विषय के खिलाफ था और न ही एसआईआर से जुड़ा हुआ था।
एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित रिपोर्ट पूरी तरह से निराधार और काल्पनिक कहानी प्रतीत होती है। उस रिपोर्ट में न तो कोई ठोस तथ्य था और न ही सच्चाई। विपक्ष ने एक काल्पनिक और तथ्यहीन लेख को हथियार बनाकर देश के लोकतंत्र और स्वतंत्र चुनाव आयोग पर सवाल उठाने की नाकाम कोशिश की, जो अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है। विपक्ष लगातार फॉर्म-6 को लेकर जनता में भ्रांति पैदा करने का षडयंत्र रच रहा था। चुनाव आयोग ने दो-टूक कहा है कि एसआईआर के लिए फॉर्म-6 से संबंधित घोषणापत्र को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्ण सही व वैध ठहराया है। गैर-एसआईआर अवधि के लिए नियमों (रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स 1960) के तहत पूर्ववत फॉर्म ही लागू हैं, किसी भी प्रक्रिया में कोई हेरफेर नहीं किया गया है।विपक्ष केवल अफवाहें फैलाता है, जबकि आयोग जमीनी स्तर पर हर मतदाता की भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है—चाहे वह रैन बसेरों, मजदूरों और बेघरों के लिए विशेष कैंप लगाना हो या छूटे हुए लोगों के घरों पर जाकर बीएलओ द्वारा फॉर्म एकत्र करना हो। देश की जनता भली-भांति जानती है कि जितने भी राज्यों में चुनाव संपन्न हुए हैं, वे पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से संपन्न हुए हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल जब चुनाव हारते हैं, तो कभी ईवीएम पर, कभी संवैधानिक संस्थाओं पर तो कभी चुनाव आयोग पर झूठे आरोप लगाते हैं। चुनाव आयोग के इस पूर्ण और सर्वसम्मत बयान के बाद कांग्रेस नेतृत्व को देश और संवैधानिक संस्थाओं से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान और उसके बाद एलन मस्क के एक बयान का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने ईवीएम को भारतीय लोकतंत्र के लिए ब्लैक बॉक्स बताया था। उन्होंने दावा किया कि संस्थागत पारदर्शिता की कमी है, जबकि चुनाव बार-बार ईवीएम की सुरक्षा और विश्वसनीयता को प्रमाणित कर चुके हैं।
राहुल गांधी ने कई बार आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रहा है और यह एक कठपुतली बन चुका है। लेकिन हर बार राहुल गांधी के झूठ को न्याय की अदालत ने खारिज किया है। ये हर बार झूठे आरोप लगाकर भाग जाते हैं। राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक तकनीकी आदेश को तोड़-मरोड़ कर राहुल गांधी ने मीडिया के सामने दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि ‘चौकीदार चोर है’। इस मामले में अदालत द्वारा अवमानना नोटिस जारी किए जाने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी। ब्रिटेन (कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, 2023) और अमेरिका के दौरों के दौरान राहुल गांधी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कहा कि भारत में सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रही है और उस पर सरकार का कड़ा नियंत्रण है। राहुल गांधी ने ऐसा बोलकर देश की न्यायिक संप्रभुता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर करने के प्रयास था | जब सीएजी ने राफेल विमान सौदे की ऑडिट रिपोर्ट संसद में पेश कर खरीद प्रक्रिया और कीमतों को संप्रभु दृष्टिकोण से सही ठहराया, तब राहुल गांधी ने सीएजी की रिपोर्ट को ही खारिज करते हुए उसे ‘चौकीदार ऑडिटर जनरल’ कहकर संस्था का उपहास उड़ाया था।
राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को देश की संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक लाभ के लिए निशाना बनाना बंद कर जनता से इस झूठे प्रचार के लिए माफी मांगनी चाहिए।

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