Thursday, September 24, 2026
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संत मौनी बाबा की 45वीं पुण्यतिथि पर उमड़े श्रद्धालु, भंडारे में हजारों ने ग्रहण किया प्रसाद

जनसागर टुडे 

 

आजमगढ़ खरीहानी-कम्हरिया – आजमगढ़ जिले के खरीहानी कम्हरिया ग्राम सभा स्थित संत मौनी बाबा सेवा आश्रम में गुरूवार को संत मौनी बाबा की 45वीं पुण्यतिथि श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ मनाई गई। पुण्यतिथि के अवसर पर आश्रम परिसर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सुबह से ही संत मौनी बाबा के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर तक जारी रहा।कार्यक्रम की अध्यक्षता संजय सिंह ने की। पुण्यतिथि के अवसर पर विधि-विधान से यज्ञ का आयोजन किया गया। पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ संपन्न कराया गया। यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पूरा आश्रम परिसर मंत्रोच्चार से गूंजता रहा। इसके बाद आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने संत मौनी बाबा की प्रतिमा के दर्शन और पूजन कर आशीर्वाद लिया। पुण्यतिथि के अवसर पर मंदिर परिसर और आश्रम को विशेष रूप से सजाया गया था। बाबा की प्रतिमा का भी आकर्षक श्रृंगार किया गया।
भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
यज्ञ, आरती और धार्मिक कार्यक्रमों के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में कम्हरिया गांव के अलावा आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग सभी ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। पूरे दिन आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संजय सिंह ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी संत मौनी बाबा की पुण्यतिथि श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। उन्होंने बताया कि संत मौनी बाबा का कम्हरिया क्षेत्र से विशेष जुड़ाव रहा है और आसपास के लोगों में उनके प्रति गहरी आस्था है।
संत मौनी बाबा के जीवन से जुड़ी मान्यताओं को किया याद
संजय सिंह ने संत मौनी बाबा के जीवन से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि मौनी बाबा बाल्यकाल से ही मौन साधना में रहते थे। स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, उनके जीवन और अंतिम समय से जुड़ी कई घटनाएं आज भी लोगों के बीच श्रद्धा के साथ स्मरण की जाती हैं। आयोजकों के अनुसार, संत मौनी बाबा ने अपने अंतिम समय को लेकर पहले ही संकेत दिया था। बताया जाता है कि उन्होंने स्वयं अपने अंतिम समय की घोषणा की थी और श्रद्धालु उन्हें सिंधिया घाट तक लेकर गए थे। स्थानीय मान्यता के अनुसार, अगले दिन निर्धारित समय पर उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए और गंगा में समाहित हो गए। संत मौनी बाबा के जीवन से जुड़ी इन मान्यताओं के कारण क्षेत्र के लोगों में उनके प्रति आज भी गहरी श्रद्धा बनी हुई है। पुण्यतिथि के आयोजन को सफल बनाने में ग्रामसभा के लोगों और श्रद्धालुओं ने सहयोग किया। कार्यक्रम में अध्यक्ष संजय सिंह के साथ विनय सिंह,मन्ना सिंह, गुड्डू सिंह, बबलू सिंह,जोंटी सिंह, दिव्यांश प्रताप सिंह,कमलेश सिंह, पंकज, सत्यवान, पुन्नू पाण्डेय, बिंदु पाण्डेय,सोनू सिंह, दीपक सिंह सहित ग्रामसभा के अन्य लोग मौजूद रहे। पूरे दिन आश्रम परिसर में धार्मिक और भक्तिमय माहौल बना रहा।

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