3 जून- “विश्व साइकिल दिवस विशेष
”
*सेहत के साथी, प्रदूषण की दुश्मन और किफायती भी है— साइकिल*
साइकिल के पुराने दिन अब वापस लौट आयगे। क्योंकि अब प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि पेट्रोल और डीजल का उपयोग कम करके मेट्रो और बस का उपयोग करने के साथ साइकिल भी चलाएं यह सलाह दी गई । 1970 के दशक में जब से तेल संकट बना हुआ,तब संसार के कई देशों ने परिवहन व्यवस्था में बदलाव आया था । अब नीदरलैंड , डेनमार्क और यूरोप के कई देशों में साइकिल – लेन का विस्तार किया गया । कई देशों में अब साइकिल चलाने का चलन बढ़ता जा रहा है। हमारे देश में भी अब इसे गरीबी या पिछड़ेपन से जोड़ने के बजाय पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम माना जाने लगा है। अब साइकिल चलाना शोकिया तौर के साथ ही डॉक्टर और जीम ट्रेनर भी इसे नियमित रूप से चलाने की सलाह देते हैं। साइकिल चलाने वाले को निम्न दृष्टि से देखने की स्थितियां अब खत्म हो चुकी है। साइकिल में भी अब अनेक विकल्प आ चुके है, रईस लोगो को बहुत अच्छी किस्म की महंगी साइकिल चलाते हुए देखा जाता है। यही नहीं देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री व अन्य मंत्रीगण भी अपने-अपने सचिवालय विश्व साइकिल दिवस पर साइकिल से ही जाते हैं। वे आम जनता को यह संदेश देते हैं, कि स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिए नियमित रूप से साइकिल चलाएं। जापान में तो हफ्ते के एक दिन सभी अधिकारी, नेतागण व आम जनता साइकिल का ही प्रयोग करते है।
सर्वविदित है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 जून 2018 को विश्व साइकिल दिवस मनाने की घोषणा की थी। जिसका कई देशों ने समर्थन किया।
यदि देखा जाए तो स्वास्थ्य के लिए सबसे सुलभ व सस्ता साधन साइकिल ही है , क्योंकि यह सेहत बनाने के साथ ही प्रदूषण की दुश्मन भी है। हर बच्चे का ख्वाब और सबसे किफायती कोई वाहन है, तो वह केवल साइकिल ही है। साइकिल की खुशी का पैमाना 200 साल से भी पुराना है। आज जितने स्टाइलिश और नए-नए अंदाज में हमारे सामने साइकिल आ रही है । वे वास्तव में कई बार परिवर्तन होकर आधुनिक युग के अनुसार बनी है।
विश्व की सबसे पहली साइकिल लकड़ी की बनी थी। इसमें लकड़ी के ही पहिए और लकड़ी के ही हैंडल थे तथा इसमें ना तो पेडल थे और ना ही चेन। जो पैदल चलकर बोझ लाद कर यात्रा करने के लिए उपयुक्त थी। ऐसे लोगों के लिए यह सायकिल जर्मनी के बैरन कार्ल वान डाइस बेरेंस ने 1817 में बनाई थी। इसके पश्चात 1860 में फ्रांस में पेडल-चेन व बैठने के लिए सीट लगाकर इसे थोड़ा और आरामदायक बना दिया गया। इसके कई वर्षों के बाद 1977 में गियर वाली साइकिल ने यूरोपीय बाजार में अपना स्थान बना लिया था। 21वीं शताब्दी की मोस्ट फेवरेट फैट बाइक इसका यह आकार ही इसकी पहचान है । तभी तो यह आज 21 गियर सस्पेंशन व 4 इंच मोटे टायर वाली फैट साइकिलों का जलवा है।
करोना काल में साइकिल इंडस्ट्री के अच्छे दिन आ गए थे। उस दौरान अर्थात करोना काल में 34 लाख साइकिल बेची गई ,यानी 2019-20 मई से जुलाई में प्रतिदिन 37,000 साइकिलों बिक्री की हुई थी। भारत दुनिया का सबसे बड़ा साइकिल उत्पादक देश हैं । यहाँ हर साल 2.20 करोड़ साइकिलों का उत्पादन होता है । पूरे देश में साइकिल इंडस्ट्री से जुड़ी तकरीबन 4000 यूनिट है। इस व्यवसाय में 5 लाख से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। देश में 90% से ज्यादा साइकिल कारोबारी व यूनिट्स कार्यरत हैं ,जो लुधियाना में है। दुनिया भर में 14 करोड़ साइकिलों का उत्पादन सालाना होता है। इसमें 9 करोड़ साइकिल केवल चीन में ही बनती है। वहीं भारत चीन से 541 करोड रुपए के कल – पुर्जे आयात करता है ।
साइकिल चलाने में सबसे बड़ी दिक्कत यह है, कि हर किसी शहर में ना तो साइकिल ट्रैक बने हुए हैं। और ना हीं सड़कों पर सिल्वर-व्हाइट पेंट की मार्किंग की गई है। ऐसे में साइकिल चलाने वालों को तेज रफ्तार कार व बाइक चलाने वालों के साथ ही सफर पूरा करना पड़ रहा है। इसमें दुर्घटना की काफी संभावनाएं बनी रहती है। वहीं विदेशों में मिलान, बलि्न, लंदन जैसी दुनिया के बड़े शहरों में साइकिल का ट्रैफिक बढ़ गया है। सिटी प्लानर इस बढ़ते हुए साइकिल ट्रैफिक के अनुसार इंतजाम कर रहे हैं।
उज्जैन में इस दिशा में हीरा मिल क्षेत्र में साइकिल ट्रैक बना है तथा साथ ही महानंदा नगर एरिया के चारों ओर भी साइकिल ट्रैक बन चुका है। साथ ही पिछले दो वर्षों में भारत सरकार साइकिल चलाने के लिए स्मार्ट सिटी में साइकिल प्रतियोगिता भी करवा रही है।
अब निश्चित ही साइकिल के प्रति जागरूकता बढ़ने व बढ़ाने की महती आवश्यकता है ,क्योंकि साइकिल चलाने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। एक उम्र के बाद इससे मोटापे व जोड़ों में दर्द की समस्या भी नहीं होती है। अतः धन की बचत और बेहतर स्वास्थ्य के लिए कम दूरी की यात्रा साइकिल से ही पूरी करना चाहिए। कुछ लोग साइकिल से यात्रा करने में भी पीछे नहीं हैं ये लोग अनिवार्य रूप से नियमित 1 घंटे साइकिल चलाते ही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार साइकिल स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण परिवहन सिद्ध हो चुका है।
साइकिल कभी आम आदमी की सवारी मानी जाती थी, लेकिन यह आधुनिक गाड़ियों की बढ़ती खपत ने इसे गायब ही कर दिया। इसके लिए हमारी सोच, सिस्टम और सरकार तीनों ही जिम्मेदार है।
साइकिल की लोकप्रियता के यह आवश्यक है, कि हेल्थ पॉलिसी में साइकिल को पॉलिसी देकर राष्ट्रीय साइकिल नीति बनाई जानी चाहिए। स्कूलों में साइकिल एजुकेशन अनिवार्य किया जाना चाहिए । साइकिल पार्किंग अनिवार्य और सिक्योर और फ्री हो। साइकिल चलाने का प्रचलन बढ़ता है, तो प्रदूषण भी 30% तक कम हो सकेगा । साइकिल से ईंधन की बचत से तेल आयात पर निर्भरता घटेगी। इसके साथ ही चिकित्सा पर होने वाला खर्च भी कम होगा , क्योंकि विदेशों में जैसे नीदरलैंड में साइकिल से प्रति व्यक्ति 1000 यूरो सालाना बचत होती है । इससे हमें न केवल यातायात में सुविधा बल्कि जीवन शैली स्वास्थ्य और पर्यावरण में सुधार संभव होगा।
*डॉ. बी. आर. नलवाया*
प्राचार्य , आरडीएस कॉलेज, बूढा ,मंदसौर (MP)






