Friday, June 5, 2026
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सुमन कुमार सिंह राघव एडवोकेट अब नहीं कर सकेंगे किसी भी न्यायालयों में विधि कार्य – पवन कुमार निम एडवोकेट

*सुमन कुमार सिंह राघव एडवोकेट अब नहीं कर सकेंगे किसी भी न्यायालयों में विधि कार्य – पवन कुमार निम एडवोकेट*

*बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने सुमन कुमार सिंह राघव एडवोकेट की वकालत का लाइसेंस किया निरस्त*

*पवन कुमार निम एडवोकेट की शिकायत पर चैयरमेन मनन मिश्र ने की कार्यवाही*

बुलंदशहर। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का फर्जी वकीलों की जांच के संबंध में दिए आदेश का असर शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में पहले फर्जी वकील मिला। बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया के चैयरमेन मनन मिश्र ने डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन बुलंदशहर के पूर्व महासचिव पवन कुमार निम एडवोकेट की शिकायत पर बड़ी कार्रवाई की है डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन बुलंदशहर में कई बार अध्यक्ष और महासचिव रहे 35 वर्षों से वकील सुमन कुमार सिंह राघव एडवोकेट की वकालत का लाइसेंस निरस्त कर दिया। एलएलबी की डिग्री की उच्च स्तरीय जांच करने के आदेश दिए और फर्जी डिग्री बनाने और सहयोग करने वालों पर होगी आपराधिक कार्रवाई व जेल भेजे जाएंगे। सभी वकीलों के दस्तावेजों की गहन जांच होगी बर काउंसिल आफ इंडिया ने राज्यों को सख्त निर्देश दिए हैं कानून के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। फर्जीवाड़ा करने वालों को किसी भी कीमत पर बक्सा नहीं जाएगा यह कार्यवाही न्यायपालिका की गरिमा और जनता के विश्वास की रक्षा के लिए की गई है।
जिला बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव पवन कुमार निम एडवोकेट द्वारा बताया गया कि सुमन कुमार सिंह राघव ने एलएलबी की तृतीय वर्ष की परीक्षा पास नहीं की थी। कहीं से फर्जी मार्कशीट बनवाकर बार काउंसिल आफ उत्तर प्रदेश से रजिस्ट्रेशन कर लिया था। कॉलेज से मांगी आरटीआई से पता चला की सुमन कुमार सिंह राघव ने एलएलबी तृतीय वर्ष की परीक्षा में कुछ विषय में एब्सेंट थी। जिसकी शिकायत बार काउंसिल आफ उत्तर प्रदेश के साथ बार काउंसिल आफ इंडिया में भी की गई। जहां गंभीरता से जांच की गई और सुमन कुमार सिंह की वकालत का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। तथा एक उच्च कमेटी बनाई गई है जिसमें सुमन कुमार सिंह राघव के दस्तावेजों की गंभीरता से जांच की जाएगी जो दो महीने के अंदर अंदर जांच पूरी करने का कार्य करेगी। तब तक सुमन कुमार सिंह राघव कि सदस्यता समाप्त कर दी गई है और यह किसी भी न्यायालय में वकालत नहीं कर सकेंगे। जिन्होंने 35 वर्षों से लोगों के साथ विश्वास घात किया है।

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