Monday, October 12, 2026
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भंवरपुर में वर्षों से जीवंत है रामलीला की परंपरा, दशहरा मेले और भरत मिलाप में उमड़ती है भीड़

जनसागर टुडे 

शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन मुकुट पूजन से होता है शुभारंभ, गांव के युवाओं द्वारा रामलीला और नाटक का मंचन बना आकर्षण

तरवां/आजमगढ़। भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को सहेजने में ग्रामीण क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य आजमगढ़ जनपद के तरवां थाना क्षेत्र अंतर्गत नूरपुर उर्फ भंवरपुर उमरी ग्रामसभा में वर्षों से किया जा रहा है। यहां प्रत्येक वर्ष शारदीय नवरात्र के अवसर पर रामलीला का आयोजन होता है। रामलीला, दशहरा मेला, रावण दहन और भरत मिलाप के माध्यम से गांव के लोग अपनी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं। हर वर्ष की भांति शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन गांव में शुभास सिंह जी के द्वार पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के मुकुट का विधि-विधान से पूजन कर रामलीला का शुभारंभ किया जाता है। मुकुट पूजन के साथ ही गांव में भक्तिमय माहौल बन जाता है। इसके बाद नवरात्र के विभिन्न दिनों में रामायण के प्रसंगों का मंचन किया जाता है।

युवाओं के अभिनय से जीवंत होती है रामकथा

भंवरपुर की रामलीला की खास बात यह है कि इसमें गांव के युवाओं की सक्रिय भागीदारी रहती है। गांव के ब्राह्मण परिवार के युवाओं द्वारा भगवान श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण के स्वरूप धारण कर रामलीला के विभिन्न प्रसंग प्रस्तुत किए जाते हैं। सुंदरकांड सहित रामायण के अन्य प्रसंगों के मंचन से दर्शकों को भगवान श्रीराम के आदर्शों, त्याग, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

दशहरे पर रावण दहन और भव्य मेले का आयोजन

ग्रामसभा स्थित कंपोजिट विद्यालय भंवरपुर के मैदान में दशहरे के अवसर पर रावण दहन और भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इसे देखने के लिए भंवरपुर के साथ जामुडीह, हरदासपुर, पट्टी, तियारा, मौपरासी सहित आसपास के कई गांवों से लोग पहुंचते हैं। रावण दहन बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश देता है। मेले में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक का उत्साह देखते ही बनता है। यह आयोजन आसपास के गांवों के लोगों को एक साथ जोड़ने का माध्यम भी बनता है।

भरत मिलाप और नाटक प्रस्तुति से बढ़ती है रौनक

दशहरे के अगले दिन भी मेले का आयोजन जारी रहता है। शाम को नवयुवक मंगल के सहयोग से गांव के लोगों द्वारा भरत मिलाप और नाटक प्रस्तुति का आयोजन किया जाता है। इसमें गांव की महिलाएं, पुरुष और बच्चे उत्साहपूर्वक पहुंचते हैं तथा स्थानीय युवाओं द्वारा प्रस्तुत नाटकों का आनंद लेते हैं। भरत मिलाप का प्रसंग भाईचारे, प्रेम, त्याग और पारिवारिक एकता का संदेश देता है।

सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की सराहनीय पहल

आधुनिक दौर में भी भंवरपुर गांव में वर्षों से रामलीला, रावण दहन, मेला और भरत मिलाप का आयोजन होना सराहनीय है। ग्रामीणों के सहयोग और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से यह परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और धार्मिक आदर्शों से जोड़ने के साथ सामाजिक सद्भाव, एकता और भाईचारे को भी मजबूत करते हैं। भंवरपुर की यह रामलीला परंपरा गांव की सांस्कृतिक पहचान बनी हुई है।

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