Tuesday, October 13, 2026
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एसीपी कार्यालय के पास दो बारों ब्लैक हाउस रेस्टोरेंट एंड कैफे और अबाउट ड्रिंक एंड बार में परोसी जा रही हुक्का और शराब

राजेंद्र नगर में ब्लैक हाउस रेस्टोरेंट एंड कैफे और अबाउट ड्रिंक एंड बार की गतिविधियों की जांच की मांग, रात से सुबह चार बजे तक संचालन का आरोप

साहिबाबाद।
साहिबाबाद के राजेंद्र नगर में एसीपी कार्यालय के आगे और पीछे संचालित दो प्रतिष्ठानों में कथित तौर पर हुक्का परोसने और शराब की बिक्री व सेवन कराने के आरोप सामने आए हैं। ब्लैक हाउस रेस्टोरेंट एंड कैफे और अबाउट ड्रिंक एंड बार को लेकर उठ रहे इन सवालों ने पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर इन प्रतिष्ठानों की गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग उठ रही है।
आरोप है कि दोनों प्रतिष्ठानों में ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध कराने के साथ शराब भी परोसी जाती है। दावा किया जा रहा है कि इनका संचालन रात से शुरू होकर सुबह करीब चार बजे तक चलता है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह जांच का विषय है कि संबंधित प्रतिष्ठानों के पास शराब परोसने, संचालन के समय और अन्य गतिविधियों के लिए आवश्यक लाइसेंस एवं अनुमतियां हैं या नहीं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

एसीपी कार्यालय के नजदीक संचालन, फिर भी कार्रवाई पर सवाल

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि जब ये प्रतिष्ठान एसीपी कार्यालय के आगे और पीछे संचालित हो रहे हैं, तो उनकी गतिविधियों की नियमित जांच हो रही है या नहीं। स्थानीय लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि यदि निर्धारित समय के बाद भी प्रतिष्ठानों का संचालन किया जा रहा है, तो संबंधित विभागों की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई है। हालांकि, पुलिस की ओर से इस मामले में किसी कार्रवाई या जांच की आधिकारिक जानकारी सामने आना आवश्यक है।

पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका अहम

मामले में साहिबाबाद पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण है। संबंधित अधिकारियों को दोनों प्रतिष्ठानों के लाइसेंस, शराब परोसने की अनुमति, निर्धारित समय और हुक्का उपलब्ध कराने से जुड़े नियमों की जांच करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर मौके पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

जांच के बाद हो कार्रवाई

राजेंद्र नगर में सामने आए इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई स्पष्ट करना जरूरी है। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित प्रतिष्ठानों के संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि सभी गतिविधियां वैध अनुमतियों के तहत संचालित हो रही हैं, तो अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे।
अब निगाहें संबंधित विभागों पर टिकी हैं कि वे इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और दोनों प्रतिष्ठानों की गतिविधियों की जांच कर क्या कदम उठाते हैं।

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