जनसागर टुडे
आजमगढ़ पल्हना – श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन भारतीय संस्कृति में केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि यह भावनाओं का वो उमड़ता हुआ समंदर है, जो हर परिवार को खुशियों के अनमोल मोतियों से भर देता है। रक्षाबंधन का यह धागा, जिसे हम ‘राखी’ कहते हैं, रेशम के चंद धागों से कहीं बढ़कर है। यह एक ऐसा अदृश्य और मजबूत बंधन है जो दो दिलों को, चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में हों, हमेशा के लिए एक-दूसरे से जोड़े रखता है। राखी के धागों में लिपटा बचपन का वो सावन बचपन के वो दिन भी कितने खूबसूरत थे, जब रक्षाबंधन के आने से कई दिन पहले ही घर में एक अलग ही हलचल शुरू हो जाती थी। बहनें दुकान-दुकान जाकर अपने भाई के लिए सबसे सुंदर राखी चुनती थीं—कभी सितारों वाली, कभी मखमली, तो कभी कार्टून वाली। और भाई इस बात की उधेड़बुन में रहते थे कि इस बार बहन को क्या उपहार देना है।
वह सुबह, जब नहा-धोकर नए कपड़ों में तैयार होना, पूजा की थाली का सजना, जिसमें रोली, चंदन, अक्षत, दीपक और भाई की पसंदीदा मिठाई होती थी। भाई के माथे पर तिलक लगाकर, उसकी कलाई पर राखी बांधते वक्त हर बहन के दिल से बस एक ही दुआ निकलती है—”मेरे भाई को दुनिया की हर खुशी मिले, उसकी उम्र लंबी हो, और वह हमेशा तरक्की की राह पर चले।”
एक वादा: सुरक्षा का, साथ का और सम्मान का
बदले में जब भाई अपनी बहन के पैर छूकर या उसे गले लगाकर रक्षा का वचन देता है, तो वह केवल किसी बाहरी संकट से रक्षा करने का वादा नहीं होता। आज के आधुनिक युग में इस वादे के मायने और भी गहरे हो गए हैं:
सपनों को पंख देने का वादा: एक भाई के रूप में अपनी बहन के सपनों, उसकी पढ़ाई और उसके करियर का सबसे बड़ा समर्थक बनना।
भावनात्मक संबल: जीवन के किसी भी मोड़ पर जब वह खुद को अकेला या कमजोर पाए, तो एक चट्टान की तरह उसके पीछे खड़े रहना।
सम्मान की रक्षा: समाज में हर परिस्थिति में उसके आत्मसम्मान को सर्वोपरि रखना।
वक्त बदला, पर अहसास वही है आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हममें से कई लोग काम, पढ़ाई या जिम्मेदारियों के कारण अपने घरों से दूर हैं। हो सकता है कि इस बार कई भाई-बहन एक-दूसरे से मीलों दूर बैठे हों। आधुनिक तकनीक ने भले ही हमें वीडियो कॉल के जरिए जोड़ दिया हो, लेकिन कलाई पर राखी बंधवाने का वो सजीव अहसास और भाई के हाथ से मिठाई खाने का वो स्वाद हमेशा याद आता है। लेकिन यही तो इस त्योहार की खूबसूरती है! दूरी चाहे कितनी भी हो, प्रेम कम नहीं होता। कूरियर से आई एक छोटी सी राखी भी जब भाई की कलाई पर सजती है, तो ऐसा लगता है जैसे बहन का पूरा आशीर्वाद और उसका प्यार उस राखी के रूप में साक्षात वहां मौजूद है।
भाई-बहन का रिश्ता: नोकझोंक और बेइंतहा मोहब्बत दुनिया में भाई-बहन का रिश्ता सबसे अनोखा है। इसमें जितनी लड़ाइयां होती हैं, उतना ही गहरा प्यार भी होता है।
रिमोट के लिए लड़ना,
मां-पापा से एक-दूसरे की शिकायत करना,
एक-दूसरे के सीक्रेट्स को छुपाना,
और मुसीबत आने पर सबसे पहले एक-दूसरे के पक्ष में खड़े हो जाना।
यह रिश्ता सिखाता है कि आप बिना किसी स्वार्थ के किसी से कितना गहरा जुड़ाव रख सकते हैं। भाई चाहे छोटा हो या बड़ा, बहन के लिए वह हमेशा एक रक्षक और दोस्त की तरह होता है। और बहन चाहे छोटी हो या बड़ी, वह भाई के लिए एक मां की तरह फिक्रमंद और एक मार्गदर्शक की तरह सच्ची होती है।
इस रक्षाबंधन पर हमारा संकल्प आइए, इस पावन अवसर पर हम केवल रस्मों तक सीमित न रहें, बल्कि अपने रिश्तों को और मजबूत बनाने का संकल्प लें। अगर बीते वक्त में कोई कड़वाहट आई हो, कोई अनबन हुई हो, तो उसे भूलकर एक बार फिर मुस्कुराकर हाथ बढ़ाएं। जिंदगी बहुत छोटी है, और भाई-बहन जैसा अनमोल तोहफा खुदा हर किसी को नहीं देता। यह त्योहार हमें यह भी याद दिलाता है कि हम न केवल अपनी सगी बहन, बल्कि समाज की हर नारी के प्रति सम्मान और सुरक्षा का भाव रखें। एक सभ्य और सुरक्षित समाज का निर्माण तभी संभव है जब हर स्त्री खुद को सुरक्षित महसूस करेगी।
रक्षाबंधन विशेष शुभकामनाएं
“रेशम के धागों का है यह मजबूत बंधन,
माथे पर तिलक और चावल से महका चंदन।
प्यार से भाई की कलाई पर राखी बांधती है बहन,
दुआ करती है कि खुशियों से भरा रहे उसका जीवन।”
इस रक्षाबंधन पर मेरी ईश्वर से यही प्रार्थना है कि आपके घर में सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का वास हो। भाई-बहन का यह अटूट स्नेह युगों-युगों तक ऐसे ही महकता रहे।
एक बार फिर आप सभी को रक्षाबंधन के पार्वती पर्व की अनंत शुभकामनाएं!






