लिथियम-आयन बैटरी और रेयर अर्थ मैग्नेट रीसाइक्लिंग यूनिट की स्थापित।
डीके निगम संवाददाता
बुलंदशहर सिकंद्राबाद में रॉकलिंक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने यहां यूपीएसआईडीसी इंडस्ट्रियल एरिया में भारत की अपनी पहली इंटीग्रेटेड रीसाइक्लिंग यूनिट शुरू करने की घोषणा की। यह प्लांट लिथियम-आयन बैटरी, रेयर अर्थ मैग्नेट (चुंबकीय धातु) और धातु वाले इंडस्ट्रियल कचरे को पूरी तरह से रीसायकल करने की क्षमता रखता है। इस कदम से भारत को जरूरी खनिज पदार्थों की रिकवरी करने और एक मजबूत ‘सर्कुलर सप्लाई चेन’ (जहां कचरे से दोबारा कच्चा माल बनाया जा सके) विकसित करने में बड़ी मदद मिलेगी।
रॉकलिंक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर लियोनार्ड अलेक्जेंडर अनसोर्ज ने कहा कि इस प्लांट की शुरुआत भारत में जरूरी खनिजों और धातुओं के लिए आधुनिक रीसाइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। लिथियम-आयन बैटरी और दुर्लभ धातुओं को प्रोसेस करने की अपनी क्षमता के जरिए कंपनी का मकसद देश में एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना है, जहां कच्चे माल का दोबारा इस्तेमाल हो सके। यह प्रयास भविष्य की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रिन्यूएबल एनर्जी (जैसे सौर और पवन ऊर्जा) और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बेहद जरूरी साबित होगा। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि इस नई यूनिट की क्षमता की बात करें तो यहां हर साल 10,000 टन लिथियम-आयन बैटरी को रीसायकल किया जा सकेगा। इसके साथ ही, यहां हर महीने 60 टन ‘रेयर अर्थ मैग्नेट’ (दुर्लभ चुंबकीय धातुओं) को अलग करने और उन्हें प्रोसेस करने का काम भी होगा। अपनी क्षमताओं को और बढ़ाने के लिए कंपनी 2026 की पहली तिमाही तक ‘रेयर अर्थ क्लोराइड’ प्रोसेसिंग लाइन का काम भी पूरा कर लेगी, जिसकी सालाना उत्पादन क्षमता 1,500 टन होगी।
टेक्नोलॉजी और प्लांट के बारे में
यह टेक्नोलॉजी इस प्लांट को अलग-अलग साइज, फॉर्मेट और केमिकल वाली बैटरियों को आसानी से प्रोसेस करने में सक्षम बनाती है। इसका खास ‘एनकैप्सूलेटेड’ प्रोसेस और गैस ट्रीटमेंट सिस्टम जहरीले पदार्थों को बाहर निकलने से पहले ही सोख लेता हैं, जिससे प्रदूषण का खतरा नहीं रहता। रीसाइक्लिंग के इस प्रोसेस के जरिए एल्युमीनियम, कॉपर और लोहे जैसी धातुओं को 98 प्रतिशत से भी ज्यादा शुद्धता के साथ वापस निकाल लिया जाता है। इसके साथ ही, यहां हाई क्वालिटी वाला ‘ब्लैक मास’ भी तैयार होता है, जिसे रिफाइन करके दोबारा नई बैटरी बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है।






