यूपीआई पर शुल्क लगाने की चर्चा से व्यापारियों में बढ़ी चिंता, नकद लेनदेन लौटने की आशंका

जनसागर टुडे गगन बंसल संवाददाता
जहांगीराबाद। यूपीआई के माध्यम से होने वाले डिजिटल भुगतान पर किसी भी तरह का शुल्क या चार्ज लगाए जाने की चर्चा ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त बोझ डाला गया, तो देश में कैशलेस अर्थव्यवस्था को जो बढ़ावा मिला है, उसे तगड़ा झटका लग सकता है और लोग दोबारा नकदी (कैश) के चलन की ओर लौटने लगेंगे। व्यापारियों का तर्क है कि उन पर पहले से ही जीएसटी और अन्य व्यावसायिक खर्चों का भारी दबाव है। ऐसे में यूपीआई पर शुल्क लगने से उनकी परिचालन लागत (ऑपरेशनल कॉस्ट) और बढ़ जाएगी। यूपीआई ने छोटे-बड़े हर तरह के कारोबार में हिसाब-किताब को बेहद पारदर्शी बनाया है। शुल्क लगने से दुकानदार और ग्राहक दोनों ही इससे कतराने लगेंगे। रेहड़ी-पटरी, ठेले और छोटी दुकानों पर भी आज यूपीआई से सुगमता से भुगतान हो रहा है। शुल्क लगने से इस वर्ग का कारोबार सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। ऐसे में यदि डिजिटल भुगतान महंगा होता है, तो ग्राहक और दुकानदार दोनों ही नकद लेनदेन को प्राथमिकता देना शुरू कर देंगे।
व्यापारियों के प्रमुख बयान
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अंशुल गर्ग का कहना है कि (डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त बोझ उचित नहीं) ”व्यापारियों पर पहले से जीएसटी का दबाव है। यूपीआई पर शुल्क से लागत बढ़ेगी, इसलिए सरकार को नया बोझ डालने के बजाय इसे प्रोत्साहित करना चाहिए।”
वहीं पंकज शर्मा ने बताया कि (शुल्क लगा तो ग्राहक भी नकद भुगतान करेंगे) ”यूपीआई से ग्राहकों को आसानी होती है। अतिरिक्त चार्ज लगा तो वे नकद भुगतान की ओर जाएंगे, जिससे डिजिटल लेनदेन की व्यवस्था प्रभावित होगी।”
इसी क्रम में राजीव अग्रवाल ने कहा कि (यूपीआई को शुल्क-मुक्त रखा जाए) यूपीआई पर किसी भी प्रकार का नया शुल्क लगाने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए। डिजिटल इंडिया मुहिम की सफलता को बनाए रखने के लिए यूपीआई की मौजूदा व्यवस्था को पूरी तरह सरल और शुल्क-मुक्त रखा जाना चाहिए।






