जिला अस्पताल की इमरजेंसी पर गंभीर सवाल, जूनियर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के भरोसे इलाज का आरोप
सीनियर डॉक्टरों की गैरमौजूदगी, बाहरी युवकों और निजी एंबुलेंस संचालकों की कथित सक्रियता को लेकर उठे सवाल।
सिटी रिपोर्टर अनिल कुमार
बुलंदशहर। जिला अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि इमरजेंसी में कई बार सीनियर डॉक्टरों की मौजूदगी नहीं रहती और मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी जूनियर डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ के भरोसे रहती है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस संबंध में मुख्यमंत्री पोर्टल (IGRS) पर शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
शिकायत में जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बाहरी युवकों और पूर्व में प्रशिक्षण ले चुके कुछ लोगों की कथित आवाजाही का भी आरोप लगाया गया है। साथ ही निजी एंबुलेंस संचालकों और अस्पताल के कुछ कर्मचारियों के बीच कथित सांठगांठ के आरोप लगाते हुए कहा गया है कि गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों के लिए रेफर कराने में कमीशन का खेल हो सकता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रात में औचक निरीक्षण की मांग
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि रात करीब 10 बजे के बाद जिला अस्पताल की इमरजेंसी का औचक निरीक्षण किया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात कुछ डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं रहते, जबकि नर्सिंग स्टाफ पर मरीजों की देखरेख का अतिरिक्त भार रहता है।
कुछ डॉक्टरों के ड्यूटी के दौरान नशे में होने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित अधिकारियों की जांच और मेडिकल परीक्षण जरूरी है।
डीएम और जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की मांग
जिला अस्पताल की व्यवस्था को लेकर उठ रहे इन सवालों के बीच जिलाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और जिले के जनप्रतिनिधियों से अस्पताल का औचक निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार कर्मचारियों और बाहरी लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
अब सवाल यह है कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग कब ठोस कदम उठाएगा। साथ ही निजी एंबुलेंस संचालकों, बाहरी लोगों और अस्पताल कर्मचारियों के बीच कथित गठजोड़ के आरोपों की निष्पक्ष जांच कब होगी, यह भी देखने वाली बात होगी।






