तहसील स्याना क्षेत्र में चल रही हरियाली पर रात के अंधेरे में आरी।
बुगरासी से यतेंद्र त्यागी की रिपोर्ट
बुगरासी/स्याना तहसील क्षेत्र में इन दिनों लकडी माफिया और सरकारी तंत्र के बीच ऐसी ‘जुगलबंदी’ चल रही है कि देखते ही देखते आम के लहलहाते बाग साफ हो रहे हैं।। दिन ढलते ही जब दुनिया सोती है, तब माफियाओं का सिंडिकेट जागता है और चीखती हरियाली के बीच रातों-रात हरे पेड़ों का ‘सफेद’ धंधा बेखौफ अंदाज में किया जा रहा है। आलम यह है कि खाकी और खाऊ-कमाऊ विभाग की चुप्पी ने माफियाओं के हौसलों को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है।
*कुल्हाड़ी की चोट… विभाग की ‘नोट’!*
क्षेत्र के ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के कुछ कारिंदों ने माफियाओं के साथ मिलकर ‘अघोषित समझौता’ कर लिया है। प्रति पेड़ के हिसाब से रेट तय हैं और इसी ‘सेटिंग’ के चलते सड़कों पर दौड़ते लकड़ी से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली किसी को नजर नहीं आते। वन विभाग के नाकों से चंद कदमों की दूरी पर माफिया आरा चलाते हैं, लेकिन साहबों को भनक तक नहीं लगती। यह चुप्पी विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरे सवालिया निशान खड़े कर रही है।
*किसान बेबस, माफिया ‘रईस’*
आम के जिन बागों को किसान औलाद की तरह पालते हैं, उन्हें माफिया चंद रुपयों के लालच और रसूख के दम पर उजाड़ रहे हैं। रात के सन्नाटे में आरा मशीनें चलती हैं और सुबह होने से पहले ही सबूत मिटा दिए जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कोई विरोध करने की हिम्मत जुटाता है, तो उसे रसूख का डर दिखाकर चुप करा दिया जाता है।
*कहाँ गए सरकार के आदेश?*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक तरफ ‘पेड़ लगाओ-पेड़ बचाओ’ के जरिए प्रदेश को हरा-भरा बनाने का संकल्प दोहरा रहे हैं, वहीं सियाना के ये बेखौफ ‘लकड़हारे’ सरकार की मंशा पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। सवाल यह है कि क्या उच्चाधिकारी इस अवैध धंधे पर लगाम लगाएंगे या हरियाली ऐसे ही माफियाओं की भेंट चढ़ती रहेगी?
साहब की ‘नजर-ए-इनायत’: बिना विभागीय मिलीभगत के प्रतिबंधित आम के पेड़ों का कटान नामुमकिन।
रात का ‘मिशन’: सूर्यास्त के बाद शुरू होता है खेल, सूर्योदय से पहले ठिकाने लगा दी जाती है लकड़ी।
ठूंठ गवाह हैं: स्याना तहसील क्षेत्र के कई इलाकों में सिर्फ कटे हुए पेड़ों के अवशेष ही प्रशासन की मुस्तैदी की पोल खोल रहे हैं।
डीएफओ हरविंदर सिंह ने बताया कि
“मामला संज्ञान में आया है। अवैध कटान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित क्षेत्र के रेंजर से रिपोर्ट तलब की गई है और दोषियों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।






