आजमगढ़ – एडीएम वित्त एवं राजस्व ,पीसीएस गंभीर सिंह का हर प्रयास सम्मान के योग्य है । उनका कहना है कि
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाला हर युवा अपने सपनों के लिए संघर्ष करता है। कोई दिन-रात पढ़ाई करता है, कोई नौकरी के साथ समय निकालकर तैयारी करता है,तो कोई सीमित संसाधनों में भी हार नहीं मानता। हर अभ्यर्थी अपनी परिस्थितियों के अनुसार अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करता है। इसलिए किसी की सफलता या असफलता से पहले उसके संघर्ष का सम्मान करना चाहिए।
समाज का भी यह दायित्व है कि वह युवाओं का मनोबल बढ़ाए। एक सकारात्मक शब्द, एक छोटी-सी प्रेरणा और विश्वास से भरा व्यवहार किसी थके हुए अभ्यर्थी के लिए नई ऊर्जा बन सकता है। हमें तुलना करने के बजाय प्रोत्साहन देने की संस्कृति विकसित करनी चाहिए।
अधिकारीगण यदि युवाओं का मार्गदर्शन करें, पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करें और उन्हें सही दिशा दिखाएँ, तो यह केवल एक व्यक्ति की नहीं,बल्कि पूरे समाज की प्रगति होगी। इसी प्रकार विद्यालय प्रबंधन एवं परीक्षा केंद्रों से भी विनम्र आग्रह है कि परीक्षा देने आने वाले विद्यार्थियों के लिए पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था, और सहयोगपूर्ण वातावरण,जैसी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराएँ, ताकि हर अभ्यर्थी बिना किसी अनावश्यक चिंता के अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके।
मैं,गंभीर सिंह,और हमारी पूरी टीम सदैव प्रयास करती है,कि स्कूलों एवं परीक्षा केंद्रों पर आने वाले अभ्यर्थियों के लिए यथासंभव उचित व्यवस्था हो और उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। साथ ही आप सभी से भी एक विनम्र अपील है कि यदि परीक्षा के दिन रास्ते में कोई अभ्यर्थी अपने परीक्षा केंद्र की तलाश में परेशान दिखाई दे, तो यदि संभव हो उसे उसके परीक्षा केंद्र तक पहुँचाने या सही मार्ग बताने में अवश्य सहयोग करें। आपका यह छोटा-सा प्रयास किसी के जीवन की बड़ी सफलता का कारण बन सकता है।
माता-पिता का योगदान सबसे महत्वपूर्ण होता है। उनका विश्वास, धैर्य और स्नेह ही वह शक्ति है जो कठिन समय में भी युवाओं को आगे बढ़ने का साहस देता है।कई बार एक पिता का विश्वास और माँ की दुआ ही वह संबल बन जाती है,जो असंभव को भी संभव बना देती है।
युवाओं को भी यह समझना चाहिए कि सफलता केवल परिणाम का नाम नहीं है, बल्कि निरंतर सीखने, अनुशासन, धैर्य और ईमानदार प्रयास का नाम है। परीक्षा का परिणाम चाहे जैसा हो, मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। वह अनुभव, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व के रूप में जीवनभर साथ रहती है।
“सपने उन्हीं के पूरे होते हैं, जो परिस्थितियों का इंतज़ार नहीं करते, बल्कि अपने प्रयासों से परिस्थितियाँ बदल देते हैं।”
आइए, हम सब मिलकर ऐसा समाज बनाएँ जहाँ हर युवा को प्रोत्साहन मिले, हर माता-पिता का विश्वास उसकी ताकत बने, हर अधिकारी प्रेरणा का स्रोत बने,और हर नागरिक यह कहे—
“तुम मेहनत करते रहो, हम तुम्हारे साथ हैं। क्योंकि एक युवा की सफलता केवल उसके परिवार की नहीं,बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की सफलता होती है।” मै जहाँ जहाँ भी उपजिलाधिकारी के पद या सिटी मजिस्ट्रेट रहा कभी भी किसी भी युवा को 107/16 या 151 मे कभी जेल नहीं भेजा उसमे सुधारात्मक कार्य के लिए प्रयास किया, ज़ब कभी बेरोजगार युवा मेरे कार्यालय मे आता है उसके काम के साथ साथ उसको मोटिवेशन और मार्गदर्शन भी करता अगर उसकी कोई मदद और भी करनी होती है तो उसको पूरा करने का प्रयास भी करता हूँ.यही नहीं कोई आर्थिक रूप से कमजोर माता पिता अपने बच्चे की शिक्षा के लिए आते है,उनकी बढ़ चढ़ कर मदद भी किया है,जहाँ जहाँ पोस्टिंग रही वहां क़े छात्रावास और पुस्तकालय को सही करवाया, इतना ही नहीं,अब तक बहुत सारे स्कूलों का जीर्णोद्धार भी करवाया,अब राइट टू एजुकेशन क़े तहत कई हज़ारो बच्चों के एडमिशन के प्रेरणा स्रोत बने ।”युवा सशक्त होगा, तभी राष्ट्र समर्थ होगा।”






