समाजवादी पार्टी के साहिबाबाद विधानसभा उपाध्यक्ष ने दशहरे पर दिया आत्ममंथन और सकारात्मक बदलाव का संदेश
गाजियाबाद। बाजारों में सजे रावण के पुतले और दशहरे पर होने वाला उनका दहन हमें बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं, लेकिन असली दशहरा तभी सार्थक होगा, जब हम अपने मन के भीतर छिपी बुराइयों को समाप्त करने का संकल्प लेंगे। यह विचार समाजवादी पार्टी के साहिबाबाद विधानसभा उपाध्यक्ष पंडित दिलीप शर्मा ने दशहरे के अवसर पर व्यक्त किए।
पंडित दिलीप शर्मा ने कहा कि रावण के पुतले का दहन तो साल में एक बार होता है, लेकिन मनुष्य को अपने अंदर छिपे अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या और आलस्य जैसे विकारों को हर दिन समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए। अहंकार इंसान को दूसरों से दूर करता है, क्रोध हंसते-खेलते रिश्तों में दरार पैदा करता है, ईर्ष्या दूसरों की खुशियों में भी दुख तलाशती है और आलस्य व्यक्ति को उसके लक्ष्य से दूर कर देता है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने रावण का वध करके संसार को धर्म, सत्य और मर्यादा की विजय का संदेश दिया था। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम भी अपने भीतर की बुराइयों पर विजय प्राप्त करें और हनुमान जी जैसी निष्ठा, साहस एवं समर्पण को अपने जीवन में अपनाएं।
पंडित दिलीप शर्मा ने लोगों से आह्वान किया कि इस दशहरे पर केवल रावण का पुतला जलाने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने भीतर की किसी एक बुराई को छोड़ने का संकल्प भी लें। यही सच्चे अर्थों में विजयदशमी का पर्व होगा और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा भाईचारे को मजबूत करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
अंत में उन्होंने सभी को विजयदशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आइए, इस बार अपने भीतर के रावण को पहचानें और उसे समाप्त करने की शुरुआत स्वयं से करें।






