Saturday, May 23, 2026
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शिक्षामित्रों के हित में स्थायी समाधान की मांग तेज, जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने सीएम योगी को भेजा विस्तृत पत्र

शिक्षामित्रों के हित में स्थायी समाधान की मांग तेज, जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने सीएम योगी को भेजा विस्तृत पत्र।

अलीगढ़/उत्तर प्रदेश: डीएलएड संयुक्त प्रशिक्षु संघ के जिलाध्यक्ष एवं शिक्षक धर्मेंद्र चौधरी ने प्रदेश के शिक्षामित्रों के हितों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत पत्र भेजते हुए कई महत्वपूर्ण और दूरगामी मांगें उठाई हैं।

धर्मेंद्र चौधरी ने अपने पत्र में शिक्षामित्रों के सम्मान, आर्थिक सुरक्षा, भविष्य की स्थिरता और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने हाल ही में सरकार द्वारा शिक्षामित्रों की सेवा अवधि 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सरकार के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के लाखों शिक्षामित्र पिछले 20 से 26 वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने और बच्चों के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उनके लिए केवल अस्थायी नहीं बल्कि एक स्थायी और न्यायसंगत समाधान की आवश्यकता है।

धर्मेंद्र चौधरी ने अपने पत्र में मांग की कि शिक्षामित्रों को वर्तमान ₹18,000 मानदेय के स्थान पर कम से कम ₹40,000 प्रतिमाह सम्मानजनक मानदेय दिया जाए। उन्होंने कहा कि यह राशि उनके कार्य, अनुभव और महंगाई के अनुरूप होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि हर वर्ष महंगाई दर के अनुसार मानदेय में नियमित बढ़ोतरी के लिए एक स्पष्ट नियमावली बनाई जाए, जैसा कि राज्य कर्मचारियों के वेतनमान में होता है।

इसके अलावा उन्होंने शिक्षामित्रों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन, फंड और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्षों तक सेवा देने के बाद शिक्षामित्रों का भविष्य सुरक्षित होना चाहिए ताकि उनका बुढ़ापा सम्मान और आर्थिक स्थिरता के साथ बीते।

उन्होंने विशेष रूप से मृतक शिक्षामित्रों के परिवारों की स्थिति पर भी चिंता जताई। धर्मेंद्र चौधरी ने कहा कि प्रदेश में 13 हजार से अधिक मृतक शिक्षामित्रों के परिवार आज भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, ऐसे में सरकार को उनके आश्रितों के लिए विशेष सहायता, रोजगार या आर्थिक सुरक्षा योजना लागू करनी चाहिए।

अपने पत्र में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि यदि कोई अस्थायी कर्मचारी लंबे समय तक समान कार्य करता है तो उसे समान सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्र वर्षों से नियमित शिक्षकों की तरह कार्य कर रहे हैं, इसलिए उन्हें भी समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए।

धर्मेंद्र चौधरी ने यह भी कहा कि सरकार पहले ही शिक्षामित्रों का मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 कर चुकी है, जो एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लेकर शिक्षामित्रों के भविष्य को सुरक्षित करे।

अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विनम्र निवेदन करते हुए कहा कि शिक्षामित्रों से जुड़े सभी मुद्दों पर जल्द से जल्द ठोस और न्यायसंगत निर्णय लिया जाए, ताकि लाखों परिवारों को राहत मिल सके और वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

अब पूरे प्रदेश की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है कि शिक्षामित्रों के लिए कोई बड़ी सौगात या स्थायी समाधान कब तक सामने आता है।

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