जन सागर टुडे संवाददाता
गाजियाबाद। बंगाल की धरती चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा समर्थको के लिए काल।बन गयी है। दुकानों मकानों पर आगजनी हत्याए व महिलाओं।तक वीभत्स अत्याचार की घटनाएं दिल हिला रही है। अराजकता के हालात में बड़ी संख्या में पलायन कर रहे है। हाहाकार चरम पर है । कोलकाता व बंगाल के अनेक भागों में व्यक्तिगत बात हुई है । भयंकर रोष व डर का माहौल है ।
यह ठीक है कि माहौल।परिवर्तन का तस पर तुष्टिकरण 40 प्रतिशत कस धुर्वीकरण , 60 प्रतिशत मतों का भाजपा को बाहरी,बंगाल की बेटी व मंचो से दुर्गा पाठ व चोट की नौटंकी से बंटवारा हो गया। बड़ी संख्या में सीटों पर कम अंतर से हारे। भाजपा विरोध में कांग्रेस व लेफ्ट ने आत्म समर्पण कर दीदी को सहायता दी ।
जो होना है हुआ पर चुनाव के बाद राजनीतिक ।हिंसा से भय बैठाना पहले कभी नही देखा। बंगलादेशियो को घुश्पैठ के बाद सरंक्षण उन्हें हावी कर देना गुंडागर्दी पर पुलिस का अनदेखी करना भविष्य के लिए खतरे का संकेत है।
हालात पर काबू देश मे दूसरा कश्मीर बनने से रोकना नागरिकों की जान मसल इज्जत बचाने हेतु कदम जरूरी है। कोर्ट के माध्यम से या संवैधानिक तरीके से राष्ट्रपति शासन ही विकल्प।है पूर्वोत्तर बचाना है बंगाल को केंद्र शासित होना ही चाइये।






