Sunday, May 10, 2026
No menu items!
spot_img
spot_img
होमNCRगाजियाबाद46 जिला पंचायत, 250 से ज्यादा प्रधान और 465 बी डी सी...

46 जिला पंचायत, 250 से ज्यादा प्रधान और 465 बी डी सी जीतकर आजाद समाज पार्टी ने यूपी में की धमाकेदार एन्ट्री

टाईम मेगजीन में चन्द्रशेखर को मिले स्थान को सही ठहराया युवाओ ने पंचायत चुनाव में युवाओ ने चन्द्रशेखर के नाम पर बरसाये वोटसत्यपाल चौधरी
 जन सागर टुडे संवाददाता   

गाजियाबाद  :  उप्र के युवाओ ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के जरिये चन्द्रशेखर को  टाईम मेगजीन द्वारा उन्हे दिये गए 193 देशो के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची के तमगे पर मुहर लगा दी है। चन्द्रशेखर की भीम आर्मी और उनकी नवगठित आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) को पहले ही चुनाव में युवा ब्रिगेड ने बम्पर सफलता दिलाकर अपने जोशीले इरादे साफ़ कर दिये हैं। संपन्न पंचायत चुनाव में यूपी के लड़को ने चन्द्रशेखर की आजाद समाज पार्टी को 46 जिला पंचायत, 250 से ज्यादा प्रधान व 465 से अधिक बी डी सी सद्स्य जिताकर चन्द्रशेखर के प्रति अपनी दीवानगी का इजहार कर दिया है। वेस्ट यूपी के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बागपत, अलीगढ़ जैसे जिलों में संगठन निर्माण की पूरी प्रक्रिया के बगैर ही आजाद समाज पार्टी ने राजनीती में डंका बजा दिया है। यहां बिजनौर जिले मे 8, मुजफ्फरनगर मे 6, अलीगढ मे 2 जिला पंचायत सद्स्य जिताकर युवाओ ने भविष्य की राजनीती का समीकरण क्लियर कर दिया है। गाजियाबाद, बुलंदशहर और बागपत जिलों में आजाद समाज पार्टी को दिये वोट बताते हैं कि वेस्ट यू पी की राजनीती में चन्द्रशेखर के बिना सियासी समीकरण नही बन पायेंगे। बागपत जैसे जिले में जहाँ शिकोह पुर ग्राम प्रधानी और बावली गाव मे निर्विरोध जीते बी डी सी विकास मौर्य के साथ ही बावली जैसे बडे गाव में महज 9 वोट से चुनाव हारे चन्द्रशेखर के उम्मीदवारों ने साबित कर दिया कि दलित और युवाओ की राजनीती किस और करवट लेने वाली है। बागपत, मुजफ्फरनगर और शामली में मूले जाटो पर आजमाया गया फार्मूला बेशक अधिक सीट ना दिला पाया हो लेकिन चन्द्रशेखर के इस फार्मूले ने उन्हे मंझे हुए राजनेता के तौर पर देखने के लिये जरुर विवश किया है।
बसपा द्वारा पैसे लेकर बांटे गए टिकट और नव आगन्तुक राजनीतिक कार्यकर्ताओ का ध्यान आकर्षित किया है। दरअसल बसपा द्वारा पैसे के बदले टिकट और चन्द्रशेखर द्वारा बिना पैसा लिये गरीब कार्यकर्ताओ को लडाने के प्रयोग के कारण उन्हे फौरी नुकसान उठाना पड़ा।सब जानते है कि पंचायत चुनाव धन,दारू और प्रलोभन का चुनाव है और पैसे वाले लोग ही इन चुनावो में उतरते हैं। लिहाजा बसपा के पास टिकट खरीदने से लेकर चुनाव में अन्धाधून्ध पैसा खर्चने वाले प्रत्याशी पहुंचे जबकि चन्द्रशेखर के पास सिमित साधनो वाले प्रत्याशी पहुंचे। इसके बावजूद सिमित साधनों वाले प्रत्याशियों को भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओ ने जूनून के साथ चुनाव लडाया, जहाँ उनके प्रत्याशी नही जीते वहां चन्द्रशेखर के प्रत्याशियों को युवाओ के जबरदस्त वोट मिले और वे मुख्य मुकाबले में रहे। पहले ही चुनाव में करीब एक साल पहले गठित पार्टी ने उप्र में धमाकेदार एन्ट्री की। आए नतीजो ने राजनीतिक विश्लेषको को दलित और युवा राजनीती की दिशा और दशा पर सोचने के लिये मजबूर तो किया ही उप्र में 2022 के विधानसभा चुनावो के नये समीकरण गढ़ने की और भी इशारा किया है। नतीजो ने भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओ को उत्साह से लवरेज कर दिया है। भाजपा के विरोध में उप्र के विधान सभा चुनाव में ध्रुवीकरण के प्रयासो में जुटी पार्टियों को चन्द्रशेखर को इग्नोर करना,इन नतीजो की रोशनी में नामुमकिन है।

- Advertisement -spot_img

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

- Advertisment -spot_img

NCR News

Most Popular

- Advertisment -spot_img