Monday, March 23, 2026
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यशोदा मेडिसिटी ने ‘मायलोमा उत्सव – लिविंग स्ट्रॉन्गर विद मायलोमा’ का आयोजन कर मरीजों के सहयोग और जागरूकता को बढ़ावा

मल्टीपल मायलोमा मरीजों की जरूरतों को समझने और सहारा देने पर केंद्रित पहल

गाजियाबाद- दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख अस्पतालों में से एक, यशोदा मेडिसिटी ने ‘मायलोमा उत्सव – लिविंग स्ट्रॉन्गर विद मायलोमा’ का आयोजन किया। यह विशेष सपोर्ट ग्रुप मीट मरीजों और उनके केयरगिवर्स को जागरूक करने, अनुभव साझा करने और समग्र देखभाल के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए डिजाइन किया गया। यशोदा इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर के हेमेटोलॉजी, हेमेटो-ऑन्कोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट (एडल्ट एवं पीडियाट्रिक) विभाग के नेतृत्व में यह पहल अस्पताल की मरीज-केंद्रित और समग्र देखभाल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इस कार्यक्रम में मल्टीपल मायलोमा मरीज, सर्वाइवर्स, उनके परिवार और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स एकत्र हुए, जिससे अनुभव साझा करने और ज्ञान बढ़ाने का एक सकारात्मक मंच तैयार हुआ।आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आध्यात्मिक वेलनेस सत्र के माध्यम से मानसिक और भावनात्मक संतुलन पर जोर दिया, वहीं डॉ. रबिन्द्र मोहन आचार्य जी ने योग के महत्व पर अपने विचार साझा किए, जिससे दीर्घकालिक बीमारी के प्रबंधन में शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य की अहम भूमिका को रेखांकित किया गया।मल्टीपल मायलोमा मरीजों और उनके परिवारों पर भावनात्मक और मानसिक रूप से भारी प्रभाव डालता है और अक्सर इससे जुड़े अनिश्चितताओं और मार्गदर्शन की जरूरत होती है। इसे ध्यान में रखते हुए, ‘मायलोमा उत्सव’ ने मरीजों में मजबूती और जुड़ाव पैदा करने पर ध्यान केंद्रित किया। कार्यक्रम में इंटरैक्टिव चर्चा और अनुभव साझा करने के सत्र आयोजित किए गए, जिससे प्रतिभागियों को न केवल व्यावहारिक जानकारी मिली, बल्कि उन्होंने सहायक नेटवर्क बनाने और दूसरों से सीखने का अवसर भी पाया।डॉ. पी. एन. अरोड़ा, चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स ने कहा, “यशोदा मेडिसिटी में हम कैंसर देखभाल को सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रखते, बल्कि मरीजों की पूरी यात्रा में उनके साथ खड़े रहते हैं। ‘मायलोमा उत्सव’ हमारी उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें हम ऐसे मंच तैयार करते हैं जो मरीजों को सशक्त बनाएं, साझा सीख को बढ़ावा दें और दीर्घकालिक देखभाल के लिए मजबूत सहयोग प्रणाली तैयार करें।”
डॉ. उपासना अरोड़ा, मैनेजिंग डायरेक्टर, यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स ने कहा, “‘मायलोमा उत्सव’ मरीजों के लिए बेहतर और केंद्रित देखभाल की दिशा में हमारा एक कदम है। गाइडेंस, सपोर्टिव सेशंस और इंटरैक्शंस के माध्यम से हमारा प्रयास है कि मरीज और उनके केयरगिवर्स अपनी स्थिति को बेहतर समझें और अपनी इस जर्नी को अधिक विश्वास के साथ आगे बढ़ा सकें।”डॉ. निवेदिता धींगरा, डायरेक्टर एवं हेड – हेमेटोलॉजी, हेमेटो-ऑन्कोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट ने कहा, “मल्टीपल मायलोमा का इलाज और देखभाल एक्सपर्ट टीम के साथ और मरीज को ध्यान में रखकर किया जाता है। ‘मायलोमा उत्सव’ जैसे सपोर्ट ग्रुप कार्यक्रम के माध्यम से हम जानकारी की कमी को दूर करने और अनुभवों के माध्यम से आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे मंच मरीजों और उनके केयरगिवर्स को बीमारी को बेहतर समझने और अपने इलाज में सक्रिय रूप से शामिल होने में मदद करते हैं।”

यह पहल यशोदा मेडिसिटी की उस सोच को दर्शाती है, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाली क्लिनिकल देखभाल के साथ-साथ संवेदनशील और सहयोगपूर्ण मरीज समर्थन के माध्यम से मल्टीपल मायलोमा मरीजों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने पर जोर दिया जाता है।

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