गाजियाबाद में जनता की उम्मीदों पर फिरा पानी.
गाजियाबाद। नगर निगम द्वारा बढ़ाए गए हाउस टैक्स के खिलाफ दायर की गई याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट से राहत की उम्मीद लगाए गाजियाबाद के लोगों को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने हाउस टैक्स के इस मामले में दाखिल याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे फिलहाल टैक्स बढ़ोतरी का निर्णय बरकरार रहेगा।
आपको बता दे कि गाजियाबाद नगर निगम ने हाल ही में हाउस टैक्स में बढ़ोतरी का निर्णय लिया था। इसके खिलाफ कुछ करदाताओं ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर इस बढ़ोतरी को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि टैक्स वृद्धि अनुचित और जनहित के खिलाफ है। लेकिन इस मामले में कोर्ट का फैसला आने के बाद उन लोगों में मायूसी छा गई जो काफी समय से हाउस टैक्स नहीं भर रहे थे और इंतजार कर रहे थे कि नगर निगम द्वारा बढ़ाया गया हाउस टैक्स वापस लिया जाए ।
कोर्ट के इस फैसले के बाद गाजियाबाद के संपत्ति मालिकों को बढ़े हुए हाउस टैक्स का भुगतान करना होगा। इससे नगर निगम को राजस्व में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जबकि आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि याचिकाकर्ता चाहें तो वे इस फैसले के खिलाफ उच्चतर न्यायालय में अपील कर सकते हैं। हालांकि फिलहाल नगर निगम का निर्णय प्रभावी रहेगा।
कोर्ट ने क्या कहा ?
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि नगर निगम द्वारा की गई टैक्स वृद्धि को रद्द करने का कोई आधार नहीं पाया गया, इसलिए याचिका खारिज की जाती है। कोर्ट का कहना है कि उपरोक्त विस्तृत चर्चा के आलोक में, हमें संपत्तियों के वर्गीकरण/वर्गीकरण के आधार पर ‘एमएमआरआर’ के निर्धारण में कोई त्रुटि नहीं मिलती है और न ही ‘एमएमआरआर’ के आधार पर संपत्ति करों को संशोधित/बढ़ाने के प्रतिवादियों के विवादित निर्णय में कोई अवैधता मिलती है। प्रतिवादियों द्वारा की गई प्रक्रिया वैधानिक प्रावधानों के पूर्णतः अनुरूप पाई गई है और इस न्यायालय द्वारा इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।77. याचिका में कोई सार नहीं है और इसलिए इसे खारिज किया जाता है।






