Saturday, January 31, 2026
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होमराज्यउत्तर प्रदेशडिबाई में निर्बाध हो रहे अवैध मिट्टी खनन पर प्रशासन मौन!

डिबाई में निर्बाध हो रहे अवैध मिट्टी खनन पर प्रशासन मौन!

डिबाई में निर्बाध हो रहे अवैध मिट्टी खनन पर प्रशासन मौन!

खनन माफियाओं को आख़िर क्यों नहीं है किसी भी अधिकारी का भय : यक्ष प्रश्न

धर्मेंद्र लोधी की रिपोर्ट 

डिबाई। जब किसी गलत और कानून विरोधी गतिविधि निरंतर और निर्बाध तरीके से संचालित की जा रही हों तो इस पर कोई संशय शेष नहीं रह जाता कि असंवैधानिक कार्य को करने वाले व्यक्ति में कानून का कोई भय बाकी शेष है । जानकारों की माने तो ये तब होता है कि जब कानून के रक्षक और जिम्मेदार पदों पर आसीन अधिकारी समाज में होने वाले गलत कार्यों से अपनी नजर फेर लेते हैं । ऐसा ही कुछ नज़ारा डिबाई विधानसभा क्षेत्र में भी प्रायः देखने को मिल रहा है कि पृथ्वी का सीना चीर कर उसकी उर्वरकता को नष्ट करते हुए अवैध मिट्टी खनन माफिया बेखौफ हो कर निरंतर और निर्बाध तरीके से मिट्टी खनन को अंजाम दे रहे है। परन्तु इस कृत्य पर लोकल प्रशासन से लेकर तहसील प्रशासन पूरी निष्ठा के साथ मूकदर्शक बना हुआ है। जिसका जीता जगता प्रमाण उस समय चरितार्थ हो जाता है जब एनएच 509 पर ठीक शाम से ही लगभग डेढ़ दर्जन ट्रैक्टर मिट्टी भर कर फर्राटा भरते प्रायः देखे जा सकते हैं। परन्तु उन्हें रोक कर कोई पूछ ले कि भाई किसकी परमिशन से आप ये मिट्टी से भरे ट्रैक्टर कहां से ला रहे हो और कहां ले जा रहे हो इसकी न तो किसी को जरूरत है और शायद किसी की हिम्मत।जबकि सूत्रों की माने तो विगत वर्ष में जब भी कभी अवैध मिट्टी खनन होता था तो उनकी हिम्मत देर रात्रि 12 बजे से पहले ट्रैक्टर निकालने की नहीं होती थी परन्तु वर्तमान में न तो रोकटोक और न कोई डर। प्राप्त जानकारी के अनुसार डिबाई के नगला खेड़ा उर्फ लैदर खेड़ा क्षेत्र से और डिबाई के ही सतोह क्षेत्र से मिनी जेसीबी मशीन के रूप में खुदाई करने वाले ट्रैक्टर युक्त उपकरण से लगातार मिट्टी खोद कर एक ही समय में एनएच 509 पर साईं धर्मकांटा के पीछे, श्रीराम इंस्टीट्यूट के पीछे, रामनगर के निकट, कर्णवास रोड से घुसराना मार्ग पर, कसेर फ्लाई ओवर के निकट कई बीघा में हो रही अवैध प्लॉटिंग में निरंतर मिट्टी डाल रहे हैं। जब इस संबंध में जिम्मेदारों से जानकारी की गई तो उनमें से अधिकांश को तो इस सब के विषय में जानकारी ही नहीं है परन्तु कुछ जिम्मेदार ऐसे भी हैं जिनके लिए आप ये मान सकते हैं कि ” किसी पेड़ के कटने का कोई किस्सा न होता अगर उस कुल्हाड़ी में उस पेड़ का हिस्सा न होता”।
आम भाषा में कहें तो मिट्टी खनन कोई बहुत बड़ा अपराध तो है नहीं.. इसलिए इस पर न तो बात होनी चाहिए और न ही इस पर कोई समाचार ही प्रकाशित होना चाहिए। क्योंकि यदि आपने कोई चर्चा या इस पर कोई समाचार लिख दिया तो निश्चित ही आप इस कृत्य के करने वाले और संरक्षण देने वालों की आंखों की किरकिरी बन जायेंगे। खैर पत्रकार को यदि सिस्टम का चौथा स्तंभ कहा गया है तो चौथा स्तंभ अपना काम अवश्य करेगा, अब इसका असर किसी पर हो या न हो परन्तु यदि समाचार हैं तो छपेगा।

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